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Monday, May 10, 2021

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रामकथा: गुरु वशिष्ठ के अनुसार पुरुषार्थ से बदला जा सकता है भाग्य



<p style=”text-align: justify;”>हिंदू धर्म के अनुसार प्रत्येक मनुष्य एक सीमित अवधि के लिए इस संसार में आता है. परमपिता ने हमारे हिस्से में जितना सुख-दुख लिखा है, उसे हमें हर हाल में भोगना पड़ता है. इस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति की नियति तय है. यही प्रारब्ध यानी भाग्य है.</p>
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